नॉर्थ यॉर्कशायर की रहने वाली 10 साल की मायला लिल्ली ब्रॉडी की मौत जनवरी 2026 में हो गई. अब उसकी मां ने बाकी लोगों को अवेयर करने के लिए अपनी बेटी की स्टोरी शेयर की है.
एक 10 साल की मासूम बच्ची की मौत ने दुनिया को झकझोर दिया है. मायला लिल्ली ब्रॉडी (Myla Lilly Broadey-Meears) दिन-रात आईपैड और मोबाइल फोन पर गेम्स खेलती और वीडियो देखती रहती थी. लेकिन ये आदत उसके लिए जानलेवा साबित हुई.
जब उसे बार-बार सिरदर्द होने लगा तो परिवार ने इसे स्क्रीन टाइम की वजह से होने वाली सामान्य समस्या समझा. लेकिन सीटी स्कैन में डॉक्टरों को ब्रेन में खौफनाक ट्यूमर नजर आया. कुछ महीनों की जंग के बाद जनवरी 2026 में बच्ची की मौत हो गई. अब मायला की मां ने अपनी बेटी की दर्दनाक कहानी सोशल मीडिया पर शेयर की है ताकि दूसरे माता-पिता सतर्क हो सकें.
हलके में ना लें सिरदर्द
मायला की मां ने पोस्ट में लिखा कि शुरुआत में कोई नहीं समझ पाया कि सिरदर्द इतना गंभीर हो सकता है. डॉक्टरों ने भी पहले स्क्रीन टाइम कम करने की सलाह दी थी. लेकिन जब दर्द बढ़ा और उल्टी होने लगी तो जांच हुई. रिपोर्ट में पता चला कि बच्ची के दिमाग में घातक ट्यूमर था जो तेजी से बढ़ रहा था. मां ने बताया कि मायला स्कूल से आते ही आईपैड हाथ में ले लेती थी. रात को भी बिस्तर पर लेटकर वीडियो देखती रहती थी. परिवार को लगा कि यह बच्चों की आम आदत है. लेकिन अत्यधिक स्क्रीन टाइम से आंखों पर दबाव, नींद की कमी और सिरदर्द जैसी समस्याएं तो होती ही है. कभी-कभी यह गंभीर बीमारी का संकेत भी हो सकता है. चिकित्सकों के अनुसार, लंबे समय तक स्क्रीन पर नजर टिकाने से डिजिटल आई स्ट्रेन होता है, जिससे सिरदर्द, आंखों में जलन और थकान महसूस होती है. लेकिन इस केस में सिरदर्द ट्यूमर के कारण था. ट्यूमर के लक्षण अक्सर स्क्रीन टाइम की समस्या से मिलते-जुलते होते हैं, इसलिए शुरुआती स्टेज में नजरअंदाज हो जाते हैं.
स्क्रीन टाइम के खतरनाक प्रभाव
विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि 10 साल से कम उम्र के बच्चों को रोजाना 1-2 घंटे से ज्यादा स्क्रीन टाइम नहीं देना चाहिए. इसके ज्यादा इस्तेमाल से बच्चों में कई तरह की समस्या देखने को मिल सकती है जिसमें नींद में कमी, एकाग्रता की समस्या, मोटापा, मानसिक स्वास्थ्य पर असर, आंखों की रोशनी कम होना शामिल है. कुछ मामलों में गंभीर बीमारियां छिपी रह सकती है. मायला की मां ने कहा, “हमने सोचा था कि आईपैड सिर्फ मनोरंजन का साधन है, लेकिन यह हमारे बच्चे की जान ले गया. हर माता-पिता से अपील है कि बच्चों की स्क्रीन टाइम मॉनिटर करे. सिरदर्द हो तो तुरंत गंभीर जांच करवाएं, स्क्रीन टाइम कम करने से ही ठीक समझकर नजरअंदाज ना करें.”
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