यह यात्रियों की सुरक्षा के लिए लगाया जाता है. किसी भी आपात स्थिति में यदि इस चैन को खींचा जाए, तो बिना लोको पायलट के ब्रेक लगाए भी ट्रेन अपने आप रुक जाती है.
भारत में आज भी ट्रेन यात्रा सबसे लोकप्रिय और भरोसेमंद परिवहन विकल्पों में से एक है. देश की बड़ी आबादी रोजाना ट्रेन से सफर करती है. कुछ लोग इसे पसंद के कारण चुनते हैं, तो कुछ के लिए यह बजट के हिसाब से सबसे किफायती साधन होता है. वहीं, लंबी दूरी के लिए भी कई यात्री ट्रेन को सबसे आरामदायक मानते हैं.
कुल मिलाकर वजहें अलग-अलग हो सकती हैं, लेकिन सच्चाई यही है कि बड़ी संख्या में लोग ट्रेन से यात्रा करते हैं. इसी बीच आज हम आपको ट्रेन से जुड़ी एक ऐसी दिलचस्प जानकारी बताने जा रहे हैं, जिसके बारे में शायद आपने पहले कभी ध्यान नहीं दिया होगा.
आपने देखा होगा कि हर पैसेंजर कोच में इमरजेंसी अलार्म चैन लगी होती है, जिसे चेन पुलिंग सिस्टम कहा जाता है. यह यात्रियों की सुरक्षा के लिए लगाया जाता है. किसी भी आपात स्थिति में यदि इस चैन को खींचा जाए, तो बिना लोको पायलट के ब्रेक लगाए भी ट्रेन अपने आप रुक जाती है. ज्यादातर लोग यह तो जानते हैं कि चैन खींचने से ट्रेन रुक जाती है, लेकिन यह प्रक्रिया कैसे काम करती है, इसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं.
दरअसल, पूरी ट्रेन में एक मोटी पाइप लगी होती है, जिसे ब्रेक पाइप कहा जाता है. इसमें इंजन से लेकर आखिरी डिब्बे तक हवा का दबाव (एयर प्रेशर) बना रहता है, जिससे पहिए आसानी से घूमते रहते हैं.
इमरजेंसी चैन इस ब्रेक सिस्टम से जुड़ी होती है. जैसे ही कोई चैन खींचता है, उससे जुड़ा वॉल्व खुल जाता है और ब्रेक पाइप की हवा तेजी से बाहर निकलने लगती है. इसके कारण प्रेशर कम हो जाता है और ब्रेक सिलेंडर सक्रिय हो जाते हैं. फिर पिस्टन के जरिए ब्रेक ब्लॉक पहियों को जकड़ लेते हैं, जिससे ट्रेन तुरंत रुक जाती है.
इसके साथ ही यह भी जानना दिलचस्प है कि ट्रेन में चैन खींचने के बाद यह कैसे पता चलता है कि किस कोच से चेन पुलिंग हुई. दरअसल, जिस डिब्बे से चैन खींची जाती है, उसके बाहर एक छोटी सी इंडिकेटर लाइट जलने लगती है. साथ ही उस कोच से हवा निकलने की आवाज भी लगातार आती रहती है, जो तब तक बंद नहीं होती जब तक RPF या गार्ड आकर सिस्टम को मैन्युअली रीसेट नहीं करते.
Source : https://hindi.news18.com/
